ॐ भद्रं कर्णेभिः: श्रवण का दिव्य अनुभव | “Om Bhadram Karnebhih: The Divine Experience of Listening

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः।
भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः।
व्यशेम देवहितं यदायूः।
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः।
स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

Meaning in English:

“Om, may we hear auspicious words with our ears. May we see auspicious things with our eyes. With stable bodies and limbs, may we praise the divine, and live out our allotted span of life for the welfare of the gods. May Indra, of great fame, be propitious to us. May Puṣan, the knower of all, be propitious to us. May Tākṣya, the destroyer of evil, be propitious to us. May Bṛhaspati grant us well-being. Om, peace, peace, peace.”

Hindi Translation:

“ॐ, हमारी कानों से मंगलमय शब्द सुनाई दें। हमारी आंखों से मंगलमय चीजें दिखाई दें। स्थिर शरीर और अंगों के साथ, हम दिव्य की प्रशंसा करें और देवों के भलाइयाँ के लिए हमारे निर्धारित जीवनकाल का अनुभव करें। बड़े नामवाले इंद्र हमारे प्रति अनुग्रहकारी हों। सभी ज्ञान वाले पूषा हमारे प्रति कृपाशील हों। सभी दुश्मनों को नष्ट करने वाले ताक्ष्य हमारे प्रति कृपाशील हों। बृहस्पति हमारे लिए भलाई प्रदान करें। ॐ, शांति, शांति, शांति।”

शांति की तलाश में व्यक्ति हमेशा रहता है। वेदों और पौराणिक ग्रंथों में एक ऐसा मन्त्र है जो शांति का स्रोत है, वो है “ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः।” इस मन्त्र का महत्व और उसका जाप कैसे करें, आइए इस ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं।

यह संस्कृत मन्त्र यजुर्वेद से लिया गया है। इसका शांति के साथ-साथ सुरक्षा के स्तर पर भी महत्व है। यह मन्त्र भगवान की कृपा को प्राप्त करने का प्रयास करता है और हमें भाग्यशाली और सुरक्षित बनाता है।

Significance of Chanting:

  1. Peace and Positivity: “ॐ भद्रं कर्णे” के जाप से मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है।
  2. Divine Protection: यह मन्त्र भगवान की कृपा और सुरक्षा की प्राप्ति में मदद करता है।
  3. Meditation Aid: इसका जाप ध्यान के दौरान भगवान की ओर मानसिक दृष्टि खींचता है।

How to Chant:

  • इस मन्त्र का जाप ध्यान में या रोज़ाना सुबह-शाम किया जा सकता है।
  • एक शांत और ध्यानित जगह पर बैठें और अपने मन को शांति में लें।
  • मन्त्र को ध्यान से उच्चारण करें, सही तरीके से सुने और समझें।
  • इस मन्त्र के जाप के साथ अपने आप को भगवान के प्रति समर्पित करें।

When to Chant:

  • इस मन्त्र का जाप दिन के किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन सुबह और शाम उचित होते हैं.
  • यदि आप इस मन्त्र को ध्यान के साथ जाप कर रहे हैं, तो सुबह ध्यान करने से मन पुरी तरह से ताजगी और शांति से भर जाता है।
  • शाम के समय जाप करने से दिन के समस्याओं से मुक्ति मिलती है और नींद के समय भगवान की शरण में स्थिति होती है.

Conclusion:

यह मन्त्र आपके मानसिक और आत्मिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण साधना हो सकता है। इसका जाप आपके जीवन में शांति, सुरक्षा, और आंतरिक सुख की ओर एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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